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रायपुर: राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में से एक, रायपुर जिला न्यायालय परिसर शनिवार को उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया जब पेशी पर आए दो युवकों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। पुरानी रंजिश को लेकर बात इतनी बढ़ गई कि एक युवक ने दूसरे के सिर पर हाथ में पहने लोहे के कड़े से जानलेवा हमला कर दिया। वार इतना जोरदार था कि पीड़ित युवक का सिर फट गया और कुछ ही देर में कोर्ट परिसर की फर्श खून से लाल हो गई। इस घटना के बाद अदालत परिसर में हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के अंतर्गत सात-आठ वर्ष पुराने एक हत्या के प्रयास के मामले में सुनवाई चल रही थी। इसी मामले की पेशी के लिए राहुल सोनी और ध्रुवेश देवांगन जिला न्यायालय पहुंचे थे। सुनवाई पूरी होने के बाद जब दोनों कोर्ट रूम से बाहर निकल रहे थे, तभी कोर्ट की दूसरी मंजिल पर किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस देखते ही देखते हिंसक हो गई और आरोपी ध्रुवेश देवांगन ने अपने हाथ में पहना लोहे का कड़ा ऊपर चढ़ाकर राहुल सोनी के सिर पर दे मारा। राहुल लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा।
हमले के वक्त कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, पक्षकार और आम नागरिक मौजूद थे। वारदात को अंजाम देकर आरोपी ध्रुवेश भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मौके पर मौजूद वकीलों और प्रत्यक्षदर्शियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। रायपुर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश देवांगन समेत अन्य वकीलों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद घायल युवक राहुल सोनी को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा सरगर्म रही कि दोनों युवक शराब के नशे में धुत्त थे, जिसके कारण विवाद इतनी जल्दी बढ़ गया। हालांकि, पुलिस इस पहलू को लेकर जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की बारीकी से जांच के बाद आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस सनसनीखेज वारदात ने रायपुर जिला न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यह परिसर प्रदेश के सबसे व्यस्ततम कोर्ट परिसरों में से एक है, जहां करीब 70 अदालतें संचालित होती हैं और प्रतिदिन 10 से 12 हजार लोगों (पक्षकार, गवाह, वकील) की आवाजाही रहती है। इतनी भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था बेहद सीमित है। हालांकि परिसर में पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन वहां तैनात अधिकांश पुलिसकर्मी जेल से पेशी पर लाए गए बंदियों की सुरक्षा और औपचारिकता में ही व्यस्त रहते हैं, जिससे आम परिसर भगवान भरोसे रहता है।