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रायपुर। सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रदेश में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। प्रशासन के निर्देश पर राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में लेडार (लेजर) बेस्ड स्पीड कैमरे लगाए गए हैं, जो अब तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सीधी नजर रखेंगे। नियमों का उल्लंघन होते ही संबंधित वाहन का ई-चालान स्वतः जनरेट हो जाएगा।
करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से लगाए गए इन हाईटेक कैमरों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और कुरूद (धमतरी) में स्थापित किया गया है। रायपुर में तेलीबांधा तालाब के सामने और वीआईपी रोड राम मंदिर मार्ग पर इन कैमरों को लगाया गया है, जहां वाहनों की रफ्तार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
100 मीटर दूर से पकड़ेंगे स्पीड
लेडार तकनीक से लैस ये कैमरे 100 मीटर दूर से ही वाहनों की गति माप सकते हैं। इन्हें परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर और वाहन पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे वाहन की पूरी जानकारी तुरंत मिल जाती है। टू-लेन सड़कों पर भी ये कैमरे प्रभावी ढंग से काम करते हैं।
कैसे काम करता है सिस्टम
लेडार कैमरे लाइट पल्स छोड़ते हैं, जो वाहन से टकराकर वापस लौटती हैं। इस प्रक्रिया में लगने वाले समय के आधार पर वाहन की गति और दूरी का सटीक अनुमान लगाया जाता है। यदि वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, तो कैमरा नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है।
मिनटों में मिलेगा ई-चालान
कैमरे वाहन पोर्टल से सीधे जुड़े होने के कारण नियम तोड़ते ही ई-चालान जनरेट हो जाएगा। वाहन मालिक को इसकी जानकारी व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजी जाएगी।
हर मौसम और रात में भी असरदार
इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी है, जिससे रात में भी स्पष्ट रूप से नंबर प्लेट रिकॉर्ड की जा सकती है। खराब मौसम या विपरीत परिस्थितियों में भी ये कैमरे पूरी क्षमता से काम करते हैं।
हादसे रोकने की दिशा में बड़ा कदम
बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए केंद्र सरकार भी इस तरह की तकनीक को बढ़ावा दे रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देशभर में हाईवे और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ऐसे कैमरे लगाने की सलाह दी है। अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।