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रायपुर: छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में रायपुर-विशाखापत्तनम कारिडोर परियोजना के तहत भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण के दौरान 500 करोड़ रुपये तक के घोटाले की जानकारी सामने आई है। इस मामले की जांच में राज्य के कई प्रशासनिक अधिकारियों को निशाने पर लिया गया है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
यह मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया जब पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य की जांच एजेंसियां केंद्रीय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती हैं।
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू, जो इस घोटाले के मुख्य आरोपी हैं, अभी तक फरार हैं। वहीं, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, तहसीलदार शशिकांत कुरें और अन्य पटवारी तथा दलालों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में शामिल लगभग 25 से अधिक राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों की जल्द गिरफ्तारी हो सकती है। ईओडब्ल्यू ने उन अधिकारियों और रसूखदारों की सूची तैयार कर ली है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए भूमि बटांकन की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया। परियोजना के अंतर्गत आने वाली भूमि का अधिग्रहण करते समय, राजस्व अधिकारी और रसूखदार जमीन दलाल मिलकर एक ही खसरे की भूमि को कागजों पर अलग-अलग हिस्सों में दिखाते थे।
इस प्रक्रिया के जरिए एक ही भूमि के लिए कई बार मुआवजा उठाया गया। मुआवजा दर में हेरफेर कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। रसूखदारों और अधिकारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये की काली कमाई की।
घोटालेबाजों ने नियमों में छेड़छाड़ कर मास्टरप्लान तैयार किया। ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर से कम भूमि पर मुआवजा दर अधिक होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए बड़ी जमीनों को कागजों पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया।
जांच एजेंसियां अब इस घोटाले में शामिल अधिकारियों और दलालों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने वाली हैं। इस घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है और इससे जुड़े अधिकारियों और दलालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत मिल रहा है।