

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

ramgopal agrawal arrest ed coal levy liquor scam chhattisgarh
रायपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी, शराब और कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की सियासत में 'भूकंप' के संकेत मिल रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद अब यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने इसे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
जांच एजेंसी की चार्जशीट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कथित घोटालों का अवैध पैसा सीधे 'कांग्रेस भवन' तक पहुंचाया जाता था। इस बीच, इस मामले के व्हिसल ब्लोअर रहे एडवोकेट नरेश चंद्र गुप्ता की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है।
गुप्ता ने अपनी पोस्ट में लिखा: “अब 10 जनपथ का चिट्ठा खुलने वाला है। एटीएम संकट में और पूर्णतः फेल। बैंक/बैंकर सब कुछ उगलेगा।”

इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में 'कोड वर्ड्स' के मायने निकालने की होड़ मच गई है। लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या 'ATM' का इशारा किसी बड़े रसूखदार व्यक्ति की ओर है? और '10 जनपथ' का उल्लेख क्या जांच की आंच को सीधे दिल्ली तक ले जाने का संकेत है? हालांकि, ये महज दावे हैं, लेकिन इन शब्दों ने मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल कोल परिवहन के अवैध लेवी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। एजेंसी का दावा है कि उनके जरिए ही अवैध वसूली की रकम को ठिकाने लगाया जाता था। दूसरी ओर, अग्रवाल और उनके समर्थक इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। उनका तर्क है कि यह पूरी कार्रवाई केवल राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया की चर्चाओं और जांच एजेंसियों के ठोस सबूतों के बीच एक बड़ी खाई है। एक विश्लेषक ने कहा, “जांच की दिशा 'सियासी कयासों' से नहीं, बल्कि कोर्ट में पेश किए जाने वाले पुख्ता दस्तावेजों और सबूतों से तय होगी। हालांकि, यह स्पष्ट है कि रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद इस जांच का दायरा अब छत्तीसगढ़ से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।”
फिलहाल रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी ने इस बहुचर्चित घोटाले को एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
अदालत की अगली सुनवाई में एजेंसी क्या नए साक्ष्य पेश करती है? क्या 'बैंकर' के बयानों से वाकई राष्ट्रीय स्तर के किसी बड़े चेहरे की मुश्किलें बढ़ेंगी? क्या आने वाले दिनों में नई गिरफ्तारियों का दौर शुरू होगा?