

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

sdm-karun-dahariya-sent-to-jail-kusmi-shutdown
बलरामपुर। जिले के कुसमी क्षेत्र में एसडीएम करुण डहरिया और उनके सहयोगियों द्वारा एक बुजुर्ग आदिवासी रामनरेश राम की कथित पिटाई के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। सोमवार रात न्यायालय के आदेश पर एसडीएम करुण डहरिया और अन्य तीन आरोपितों को जेल भेज दिया गया।
इस घटना के विरोध में सर्व आदिवासी समाज के आह्वान पर मंगलवार को कुसमी बंद रहा। सुबह से ही बस स्टैंड पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस धरने में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और मांग की कि मारपीट में घायलों को पाँच-पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। मृतक रामनरेश राम के आश्रितों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार पारस शर्मा पर भी घटना में शामिल होने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस पार्टी ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने में शामिल हुए।
रामनरेश राम एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मुखिया थे। हंसपुर गांव में उनका छोटा सा कच्चा मकान था। उनकी पत्नी की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी और वे दो बेटों के पिता थे। उनके तीनों बेटे बाहर मेहनत-मजदूरी करते हैं।
रामनरेश राम का पोस्टमार्टम सोमवार को ही कर दिया गया था। हालांकि, अंतिम संस्कार में देरी हुई क्योंकि उनके पुत्र ने शव लेने से इनकार कर दिया। इसके कारण शव दिनभर कुसमी पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर वाहन में रखा गया। शव की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। अंततः अगले दिन शाम को स्वजनों ने शव को सुपुर्दनामे में लिया। बुधवार को अंतिम संस्कार की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कुसमी क्षेत्र में झारखंड से आए कुछ लोग बauxite का अवैध खनन कर मोटी कमाई कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि यह अवैध कार्य लंबे समय से चल रहा था और इसमें प्रशासनिक संरक्षण भी मिल रहा था।
ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम करुण डहरिया और उनके सहयोगी इस अवैध खनन से लाभ प्राप्त कर रहे थे। ग्रामीणों द्वारा अवैध खनन का विरोध करने पर तनाव बढ़ा और क्षेत्र में भय का माहौल बन गया, जिसके बाद विवाद और बुजुर्ग की मौत जैसी दुखद घटना हुई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर कांग्रेस ने इस घटना की जांच के लिए दस सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति का नेतृत्व पूर्व मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। समिति का उद्देश्य गांव का दौरा करना, मृतक व पीड़ित परिवार, ग्रामीण और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर तथ्य जुटाना है।
समिति में शामिल सदस्य हैं:
डा. प्रीतम राम, पारसनाथ राजवाड़े, भानुप्रताप सिंह, डा. अजय तिर्की, विजय पैकरा, शफी अहमद, राजेंद्र तिवारी, राकेश गुप्ता और हरिहर प्रसाद यादव।
घटना के बाद मंगलवार को भी कुसमी में भारी पुलिस बल तैनात रहा। ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए पुलिस सतर्क है।
यह मामला बलरामपुर जिले में आदिवासी समुदाय और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है और स्थानीय प्रशासन तथा राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।