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नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। Tolo News की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान शासन यानी Islamic Emirate of Afghanistan की सेनाओं ने कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक और शोराबक ज़िलों में डूरंड लाइन के पास स्थित दो पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्टों पर कब्ज़ा कर लिया है। तालिबान ने डूरंड लाइन को “काल्पनिक सीमा” बताते हुए कार्रवाई को अपनी संप्रभुता से जोड़ा है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अफ़गान तालिबान ने पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित Noor Khan Air Base पर हथियारबंद ड्रोन से हमला करने का दावा किया। बताया जा रहा है कि यह हमला कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाकर किया गया। यह एयरबेस रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है और पहले भी क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान चर्चा में रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन चले सीमित युद्ध के बाद इस एयरबेस पर मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य जारी था। ऐसे में ताज़ा हमले ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
अफ़गानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर “सटीक और समन्वित हवाई अभियान” चलाए। बयान में क्वेटा स्थित 12वीं डिवीजन मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मोहमंद क्षेत्र में ख्वाजाई कैंप को भी निशाना बनाने का दावा किया गया।
इससे पहले तालिबान अधिकारियों ने पूर्वी अफ़गान शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया था। Agence France-Presse (AFP) की रिपोर्ट के अनुसार, पायलट पैराशूट के जरिए नीचे उतरा और उसे ज़िंदा हिरासत में ले लिया गया। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
शुक्रवार को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान की राजधानी Kabul और दक्षिणी शहर Kandahar पर एयरस्ट्राइक की। कंधार को तालिबान नेतृत्व का प्रमुख गढ़ माना जाता है, जहां सुप्रीम लीडर Hibatullah Akhundzada का ठिकाना बताया जाता है।
पाकिस्तानी सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि इन हमलों में 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से अधिक घायल हुए और कई चौकियों को तबाह कर दिया गया या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया।
दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। हालिया घटनाक्रम ने सीमा पार सैन्य टकराव को खुली झड़पों में बदल दिया है। लगातार ड्रोन हमलों, एयरस्ट्राइक और पोस्ट कब्ज़े की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को अस्थिर बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह तनाव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से आधिकारिक बयानों और सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कड़ी नजर बनी हुई है।