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जबलपुर: अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मामले के मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने शुक्रवार को जबलपुर जिला कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया, जहां पहले से मुस्तैद भोपाल पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया. इस दौरान कोर्ट परिसर में करीब एक घंटे तक भारी गहमागहमी बनी रही. पुलिस से बचने और पहचान छुपाने के लिए समर्थ के कपड़े भी बदलवाए गए. पुलिस उसे गिरफ्तार कर भोपाल के लिए रवाना हो चुकी है.
बता दें कि 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. ट्विशा, रिटायर्ड महिला जज गिरीबाला सिंह की बहू थीं. जहां ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, वहीं मायके पक्ष ने हत्या का गंभीर आरोप लगाया है. हाल ही में ट्विशा की एक वॉट्सएप चैट भी वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने अपनी मां को लिखा था, *“मुझे बहुत घुटन हो रही है मां… ये लोग न रोने देंगे, न हंसने की वजह देंगे.”*
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम (Re-postmortem) कराने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. कोर्ट के निर्देशानुसार, दिल्ली AIIMS के डायरेक्टर के नेतृत्व में एक विशेष डॉक्टरों की टीम भोपाल AIIMS में यह पोस्टमॉर्टम करेगी. इस पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाएगी. तब तक पुलिस को शव पूरी तरह सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही, मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की सिफारिश करते हुए केंद्र सरकार को पत्र भेज दिया है.
कोर्ट में सरेंडर के साथ ही आरोपी समर्थ सिंह को एक और बड़ा झटका लगा है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से वकील समर्थ सिंह का वकालत लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए हैं. जबलपुर कोर्ट में सुनवाई के दौरान समर्थ के वकील जयदीप कौरव ने बताया कि उन्होंने समर्थ की अग्रिम जमानत याचिका को वापस ले लिया है.
इधर, राज्य सरकार ने ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से मिली अग्रिम जमानत को चुनौती दी है. सरकार ने जमानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसकी पैरवी के लिए खुद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा- “सशर्त अग्रिम जमानत मिलने के कारण आरोपी पक्ष से अभियोजन को जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे केस के साक्ष्यों (Evidence) के प्रभावित होने का भारी अंदेशा है.”
जस्टिस अवनींद्र सिंह की कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले को अब डिवीजन बेंच (खंडपीठ) को रेफर कर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित पक्षों को नोटिस तामील कराने का निर्देश दिया है. इस पूरे मामले पर अगली बड़ी सुनवाई 25 मई को दोपहर 2:30 बजे होगी, जहां आरोपी पक्ष को अपना जवाब दाखिल करना होगा.