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upi payment rules 2026 mdr charges above 2000 rupees
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर इन दिनों एक बड़ी खबर चर्चा में है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अब UPI पेमेंट पर चार्ज लगना शुरू हो गया है। हालांकि, स्थिति ऐसी नहीं है। आम ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट अभी भी पहले की तरह चार्ज-फ्री है।
दरअसल, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद 2000 रुपये तक के UPI पेमेंट और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को बैंक चार्ज से बाहर रखा गया है। वहीं, 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अभी MDR की नई दरें तय नहीं हुई हैं और न ही इसे लागू किया गया है।
क्या बदला है UPI के नियमों में?
नई अधिसूचना का मुख्य असर मर्चेंट पेमेंट पर पड़ सकता है। सरकार ने तय सीमा तक के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर बैंक चार्ज लगाने से सुरक्षा बरकरार रखी है। वहीं, 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क लगाने का कानूनी प्रावधान अब संभव हो गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई ग्राहक दुकान, मॉल, रेस्टोरेंट या किसी अन्य व्यापारी को UPI के जरिए भुगतान करता है, तो सिर्फ इस वजह से ग्राहक के बैंक खाते से अतिरिक्त पैसा काटे जाने की बात नहीं है। संभावित MDR मर्चेंट यानी दुकानदार और पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच लागू होने वाला शुल्क होगा।
जनवरी 2020 में खत्म किया गया था MDR
UPI को देशभर में तेजी से बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले कुछ डिजिटल पेमेंट पर MDR को शून्य कर दिया था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को ज्यादा सस्ता और आसान बनाना था।
अब सरकार की नई पहल के बाद 2000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर MDR दोबारा लागू करने का कानूनी रास्ता तैयार हो गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आज से ही दुकानदारों से कोई निश्चित प्रतिशत शुल्क काटा जा रहा है।
PSS Act में संशोधन के बाद खुला रास्ता
MDR को लेकर यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। जुलाई में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि सरकार 2000 रुपये की सीमा को ध्यान में रखते हुए MDR व्यवस्था वापस लाने पर विचार कर रही है।
इसके बाद संसद के पिछले मानसून सत्र में Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन किया गया। इसी कानूनी बदलाव के बाद UPI पर संभावित शुल्क लागू करने का रास्ता खुला है।
यानी सरकार ने फिलहाल कानूनी ढांचा तैयार किया है, जबकि वास्तविक शुल्क कितना होगा और किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, इसका फैसला अभी बाकी है।
क्या आम आदमी के खाते से कटेगा पैसा?
यह सबसे बड़ा सवाल है और इसे लेकर लोगों में सबसे ज्यादा भ्रम है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम ग्राहक के UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है। इसलिए ग्राहक अगर किसी दुकान पर UPI से 2500 रुपये का भुगतान करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके खाते से 2500 रुपये के अलावा अलग से MDR काट लिया जाएगा।
हालांकि, भविष्य में अगर कोई व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों से वसूलने की कोशिश करता है, तो वह अलग मामला होगा और उस पर लागू नियमों को देखना होगा।
कितने UPI पेमेंट 2000 रुपये से ज्यादा के हैं?
CareEdge की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू में मर्चेंट पेमेंट की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी है। इनमें से लगभग 67.2 फीसदी भुगतान 2000 रुपये से ज्यादा के हैं।
इस वजह से MDR की संभावित वापसी का असर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर बड़े मर्चेंट, ई-कॉमर्स, रिटेल और हाई-वैल्यू UPI ट्रांजैक्शन इससे प्रभावित हो सकते हैं।
NPCI करेगा MDR की दरें तय?
अब सबसे ज्यादा नजर National Payments Corporation of India (NPCI) के अगले निर्देश पर है।
फिलहाल MDR की कोई नई दर घोषित नहीं की गई है। बताया गया है कि NPCI की अध्यक्षता वाली UPI and Services Steering Committee अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर शुल्क की व्यवस्था और दरों पर फैसला करेगी।
NPCI की ओर से सर्कुलर जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि—
- MDR की दर कितनी होगी?
- किन मर्चेंट कैटेगरी पर लागू होगी?
- 2000 रुपये से ऊपर किस तरह के ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आएंगे?
- छोटे दुकानदारों को इससे कितना असर होगा?
- क्या किसी खास कैटेगरी को छूट मिलेगी?
सरकार ने पहले ही दिया है राहत का संकेत
वित्त मंत्रालय की ओर से अगस्त में दिए गए बयान में संकेत दिया गया था कि भविष्य में लागू होने वाला MDR बहुत मामूली रखा जा सकता है और यह सभी तरह के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक समान तरीके से लागू नहीं होगा।
इसलिए फिलहाल सोशल मीडिया या कुछ रिपोर्ट्स में चल रही इस धारणा से बचने की जरूरत है कि “अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज कटेगा।” ऐसी स्थिति अभी नहीं आई है।
फिलहाल UPI पहले की तरह ही काम करेगा
कुल मिलाकर नई व्यवस्था को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि अभी UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है। 2000 रुपये तक के भुगतान को चार्ज से बाहर रखने की व्यवस्था स्पष्ट है, जबकि 2000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू करने के लिए कानूनी रास्ता साफ किया गया है।
अब असली बदलाव तब माना जाएगा, जब NPCI की ओर से नई MDR दरों को लेकर आधिकारिक सर्कुलर जारी किया जाएगा। तब तक ग्राहक पहले की तरह UPI से भुगतान कर सकते हैं और उन्हें किसी नए UPI चार्ज को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।