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us senator lindsey graham warns pakistan over abraham accords iran israel issue
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अपने विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। ग्राहम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान को इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले 'अब्राहम अकॉर्ड्स' (Abraham Accords) में शामिल होने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग का तुरंत जवाब देना चाहिए। इस बयान के बाद पाकिस्तान सहित दुनिया भर के सोशल मीडिया पर अमेरिकी सीनेटर की तीखी आलोचना हो रही है।
बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर जारी अपने बयान में सीनेटर ग्राहम ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। ग्राहम के मुताबिक, "यह साफ है कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान एक बहुत बड़ी समस्या है और इजरायल के साथ उसकी पुरानी दुश्मनी है। उन्होंने दावा किया कि हालिया संघर्ष विराम के दौरान ईरानी सैन्य विमान (जिसमें एक RC-130 विमान शामिल है) संभावित अमेरिकी हमलों से बचने के लिए रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर मौजूद थे। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को 'बेबुनियाद और गुमराह करने वाला' बताकर खारिज कर दिया है। ग्राहम ने कहा कि यदि पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर जैसे देश अब्राहम समझौते में शामिल नहीं होते हैं, तो *"हमारे भविष्य के संबंधों के लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे।"
क्या है अब्राहम समझौता (Abraham Accords)?
यह साल 2020 में शुरू हुई एक कूटनीतिक कड़ियाँ हैं, जिसके तहत इजरायल और कुछ अरब/मुस्लिम देशों के बीच संबंधों को सामान्य और शांतिपूर्ण बनाने पर सहमति बनी थी। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने अन्य देशों को भी इसका हिस्सा बनने की मंशा जताई है।
सीनेटर ग्राहम का यह गुस्सा पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस पुराने रुख पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कभी भी इस समझौते में शामिल नहीं होगा क्योंकि वह इजरायल पर भरोसा नहीं करता।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल की आक्रामक नीतियों की आलोचना करते हुए उसे 'कैंसर' करार दिया था और कहा था कि गजा, ईरान और लेबनान में खून-खराबा जारी है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे बेहद भड़काऊ बताया था और कहा था कि खुद को निष्पक्ष मध्यस्थ कहने वाली सरकार से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती।
ग्राहम के इस 'धमकी भरे लहजे' पर सोशल मीडिया यूजर्स और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। त्रिता पारसी नाम के यूजर ने लिखा: “लिंडसे ग्राहम ने हर उस मध्यस्थ पर हमला किया है जिसने अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने की कोशिश की, क्योंकि वह चाहते ही नहीं कि यह विवाद कभी सुलझे।”
टॉम फोर्डी (अमेरिकी यूजर) ने लिखा : “वह ईरान के साथ युद्ध चाहते हैं। पाकिस्तान इसलिए मध्यस्थता कर रहा है क्योंकि उसके ईरान, खाड़ी देशों, चीन और अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं। इस्लामाबाद के लिए मध्यस्थता और इजरायल के साथ संबंध दो बिल्कुल अलग चीजें हैं।”
आसिफ ने कहा : “यह केवल दुश्मनी नहीं, बल्कि पाकिस्तान का स्थायी कूटनीतिक रुख है। जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य का गठन नहीं होता, पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा।”
एक अन्य यूजर ने लिखा- “पब्लिकली संप्रभु देशों से 'अभी जवाब दो' कहना कूटनीति कम और किसी औपनिवेशिक (Colonial) दौर की जमींदारी मानसिकता को ज्यादा दर्शाता है।”