

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

varnika-sharma-durg-visit-child-marriage-prevention-chhattisgarh
दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा गुरुवार को दुर्ग जिले के दौरे पर पहुंचीं। यहां उन्होंने बाल विवाह रोकथाम विषय पर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया और जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए आयोग ने युद्धस्तर पर तैयारी की है और किसी भी पीड़ित बच्चे के संरक्षण, शिक्षा तथा पुनर्वास के लिए पूरी व्यवस्था उपलब्ध है।
वर्णिका शर्मा ने कहा कि आयोग का पहला उद्देश्य ऐसा सामाजिक परिवेश तैयार करना है, जहां बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों और विशेषकर बच्चियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन को प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा या बच्ची किसी भी समय इस नंबर पर फोन कर मदद मांग सकता है। आयोग के पास पीड़ित बच्चियों के लिए शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास की संपूर्ण व्यवस्था है। यदि परिवार बच्चियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए तैयार नहीं होता, तो आयोग की टीम पूरी तरह बच्चों के साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई केवल कानूनी नहीं बल्कि संवेदनशील भी होनी चाहिए। उनके अनुसार, “कार्यवाही गर्व-स्पर्शी नहीं, बल्कि मर्म-स्पर्शी होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि लोगों को लगातार यह समझाया जा रहा है कि कम उम्र में विवाह होने से एक बच्ची के जीवन के सपने टूट जाते हैं। वहीं जब बालिग होने के बाद विवाह होता है, तो युवक-युवती का शारीरिक और मानसिक विकास पूर्ण रूप से हो चुका होता है और वे बेहतर जीवन जी सकते हैं।
आयोग अध्यक्ष ने बताया कि इस अभियान में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य सहायिकाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग सामूहिक रूप से जुटते हैं, वहां पंच, सरपंच, पंचायत सचिव और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही गांवों में नुक्कड़ नाटक और नाट्य मंचन के जरिए लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य के कई जिलों में इस दिशा में अभिनव पहलें की जा रही हैं। कांकेर जिले में ‘मेरी आवाज सुनो’ अभियान के तहत वे बच्चियां जो बाल विवाह जैसी स्थिति से बाहर निकाली गई हैं, अब खुद जागरूकता की मिसाल बनकर गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। वहीं बीजापुर में ‘बीजा टुलिन’ और ‘बीजा दुतीन’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय भाषा में पोस्टर और जनसंवाद के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है। इन अभियानों में एनएसएस और युवा छात्रों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
वर्णिका शर्मा ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़की की विवाह योग्य आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे कम आयु में होने वाला विवाह कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बाल विवाह की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए आयोग ने पहले से निगरानी और जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के अधिकारों का हनन है। इसे रोकने के लिए आयोग ने प्रदेशभर के DPO, DCPO और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लगातार समीक्षा बैठकें शुरू की हैं। आयोग का स्पष्ट संदेश है कि “प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर”, यानी रोकथाम ही सबसे बेहतर उपाय है।
आयोग अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग देने या उसे बढ़ावा देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक का कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ समाज और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा, तभी बच्चों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।