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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में वेदांता पावर प्लांट हादसे, औद्योगिक सुरक्षा, मुआवजा और सरकारी कार्यक्रमों के भुगतान में कथित अनियमितताओं को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वेदांता हादसे में कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने कहा कि जांच के आधार पर जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
वेदांता हादसे पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रश्नकाल के दौरान पूछा कि क्या औद्योगिक हादसों में सभी उद्योगों के संचालकों और निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी या फिर केवल वेदांता के मामले में दबाव बनाने के लिए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है।
इस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विधानसभा में किसी व्यक्ति का नाम लेकर इस तरह की चर्चा करना नियमों के अनुरूप नहीं है।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि मामले की पुलिस विवेचना जारी है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
औद्योगिक सुरक्षा और सेफ्टी ऑडिट पर भी बहस
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि 1 जनवरी 2024 से 31 मई 2026 के बीच औद्योगिक दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में मजदूरों की मौत हुई है। उनका आरोप था कि नियमित सेफ्टी ऑडिट नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
इसके जवाब में उद्योग मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 से 2026 तक राज्य के 76 कारखानों का सुरक्षा ऑडिट किया गया, जिनमें 32 अति-खतरनाक श्रेणी के उद्योग शामिल हैं। इनमें से पांच स्थानों पर दुर्घटनाएं हुईं, लेकिन सभी का सुरक्षा ऑडिट कराया गया था।
वेदांता हादसे की एफआईआर और कार्रवाई पर सवाल
चरणदास महंत ने कहा कि वेदांता लिमिटेड हादसे में 25 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, लेकिन लिखित जवाब में अनिल अग्रवाल का नाम नहीं है, जबकि पुलिस एफआईआर में उनका उल्लेख है। उन्होंने पूछा कि अनिल अग्रवाल के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई और क्या पूछताछ के लिए कोई टीम विदेश भेजी गई।
मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि पुलिस पूरी मुस्तैदी से जांच कर रही है और विवेचना के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कंपनी के अधिकारियों अरुण मिश्रा और देवेंद्र पटेल के खिलाफ डभरा थाने में एफआईआर दर्ज है तथा जांच आगे बढ़ रही है।
मुआवजे को लेकर भी हुआ विवाद
विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को अब तक कंपनी की ओर से मुआवजा नहीं मिला है।
इस पर मंत्री देवांगन ने कहा कि कंपनी ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये, घायलों को 15-15 लाख रुपये, प्रधानमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की प्रक्रिया भी जारी है।
हालांकि रामकुमार यादव ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र के पीड़ित परिवारों को अभी तक राशि प्राप्त नहीं हुई है।
भूपेश बोले- क्या केवल अनिल अग्रवाल ही उदाहरण?
भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में पहले भी बड़े औद्योगिक हादसे हुए हैं, लेकिन तब उद्योगों के शीर्ष निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि क्या अब भविष्य में हर औद्योगिक दुर्घटना में कंपनी के निदेशक पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी या केवल वेदांता मामले में ऐसा किया गया है।
इस पर मंत्री देवांगन ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्री अनिल अग्रवाल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके जवाब में भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार किसी अन्य उद्देश्य से उद्योगपति पर दबाव बना रही है।
सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सरकारी कार्यक्रमों के भुगतान में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा
भाजपा विधायक अटल श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री के तखतपुर दौरे से जुड़े कार्यक्रमों में टेंट, साउंड सिस्टम और अन्य व्यवस्थाओं के भुगतान में कथित अनियमितताओं का मामला उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल एक स्थान पर हुआ, लेकिन दूसरे स्थान के नाम पर भी लाखों रुपये के बिल लगाए गए। उन्होंने कुछ कार्यक्रमों के टेंट, साउंड सिस्टम और फ्लाइट उद्घाटन समारोह से जुड़े भुगतानों पर भी सवाल उठाए।
उपमुख्यमंत्री साव बोले- सबूत दीजिए, जांच होगी
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि किसी भी भुगतान से पहले सभी बिलों का विधिवत सत्यापन किया जाता है। यदि किसी सदस्य के पास किसी विशेष मामले में अनियमितता के प्रमाण हैं तो वे सरकार को उपलब्ध कराएं। सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी और यदि गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सदन की कार्यवाही के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के वॉकआउट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी सदन में किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होती है, कांग्रेस चर्चा से बचने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। यह पूरे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण विषय है और ऐसे मुद्दों पर विपक्ष को चर्चा से भागने के बजाय सदन में अपनी बात रखनी चाहिए।