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रायपुर। वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मामले में दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद सामान्य और जमानतीय धाराओं में दर्ज करने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार बड़े उद्योगपतियों के सामने झुक गई है।
डॉ. महंत ने मांग की कि इस मामले में दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत सदोष मानववध का मामला दर्ज किया जाए और जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए। उनका कहना है कि प्रारंभिक जांच से ही यह संकेत मिल रहे हैं कि हादसा गंभीर लापरवाही का परिणाम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने मुनाफे के लिए चीनी सामान और विदेशों से पुराना कबाड़ लाकर फैक्ट्री तैयार की, जिससे मशीनों की गुणवत्ता प्रभावित हुई। इसके साथ ही सुरक्षा ऑडिट न होने को भी उन्होंने हादसे का प्रमुख कारण बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि भाजपा शासनकाल में पुराने और कम गुणवत्ता वाले संयंत्रों का अधिग्रहण वेदांता द्वारा किया गया, लेकिन सुरक्षा मानकों को अपग्रेड करने के बजाय केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही और अनुभवहीनता का आरोप लगाया।
डॉ. महंत ने उद्योग विभाग से हादसे के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच कराने की मांग की है और घायलों को बेहतर इलाज के लिए मुंबई और कोयम्बटूर जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों की बर्न यूनिट में भेजने की अपील की है।
उधर, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में बताया था कि बीते तीन वर्षों में प्रदेश में 296 औद्योगिक दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। विपक्ष का कहना है कि यह हादसा मंत्री के निवास से मात्र 5 किलोमीटर दूरी पर हुआ है, जो औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि 2003 से 2018 के बीच भाजपा शासनकाल में पावर प्लांट परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिसमें नियमों में ढील के कारण अनुभवहीन लोगों को भी बड़े उद्योग स्थापित करने का अवसर मिला।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।