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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा प्रशासनिक और सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कैबिनेट का बड़ा विस्तार किया है। राजभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस नए विस्तार के बाद अब राज्य में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
जानें किसे क्या मिला
कैबिनेट विस्तार के बाद पश्चिम बंगाल मंत्रिपरिषद की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
राज्य में अब मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो गई है। 5 कैबिनेट मंत्रियों ने पहले ही शपथ ले ली थी। सोमवार को हुए विस्तार में 13 कैबिनेट मंत्री, 3 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री बनाए गए हैं। महज़ 32 साल के बिराज बिस्वास को कैबिनेट में शामिल किया गया है, जो इस नई सरकार के सबसे युवा मंत्री बन गए हैं।
इस नए कैबिनेट विस्तार में एक खास पहलू यह रहा कि मंत्रिपरिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले घट गई है। वर्तमान शुभेंदु अधिकारी सरकार में महिला मंत्रियों की कुल संख्या केवल 6 है। इसके विपरीत, साल 2021 की तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार में 9 महिला मंत्री शामिल थीं।
फर्जी हस्ताक्षर विवाद: तृणमूल कांग्रेस ने दो विधायकों को पार्टी से निकाला
पश्चिम बंगाल में चल रहे 'हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा' मामले में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा एक्शन लिया है। टीएमसी ने अपने दो विधायकों—रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित (पार्टी से बाहर) कर दिया है।
इसी मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी (CID) की टीम 48 घंटे के भीतर दूसरी बार टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को दूसरा समन भी सौंपा है।
पुलिस की अनुमति नहीं, फिर भी धरना देगी टीएमसी: ममता बनर्जी
बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद उनकी पार्टी प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन करेगी। ममता बनर्जी का कहना है कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों और अन्य ज्वलंत मुद्दों के खिलाफ यह धरना तय कार्यक्रम के अनुसार ही होकर रहेगा।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
बंगाल में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें निर्वाचन आयोग (Election Commission) और राज्य सरकार से मांग की गई है कि वे संशोधन की विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी को सार्वजनिक करें।